सृजन करने वाला महान होता है। निर्माण हर कोई नहीं कर सकता, तोड़ तो कोई भी सकता है।

इतिहास की बात करे तो भारतीय सभ्यता और संस्कृति सुदूर प्रसारित थी। पाकिस्तान का कालखंड तो केवल सतर वर्ष का है। वह भी भारत विभाजन से ।

पाकिस्तान बन तो गया लेकिन वहां मुल्ले मौलवी का जनमानस में फौज से भी ज्यादा दखल है। उनका विरोध करने की प्रवृत्ति और हिम्मत किसी में नहीं।

दिग्भ्रमित पाकिस्तान की दिक्कत यह है कि खुद के पूर्वजों की महान विरासत को भूलकर अपने ही पूर्वजों के हत्यारे और लूटेरे मो.बिन कासिम को हीरो मानता है और उसी के आगमन 712 ई. से इतिहास आरंभ हुआ मानता है।

पाकिस्तान का निर्माण धर्म की नींव पर हुआ। यहां सच और तर्क को स्वीकार नहीं किया जाता यदि ऐसा किया गया तो टू नेशन थ्योरी से गलत सिद्ध होने से पाकिस्तान का अस्तित्व ही ख़तरे में पड़ जाएगा।

पाकिस्तान कभी खुद को तुर्कों को अपने पूर्वज मानता है तो कभी अरबों को मानकर दीवार घड़ी के पैन्डूलम की भांति डांवाडोल है।

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