डोंट अंडर एस्टीमेट द पॉवर ऑफ कॉमन मैन यानी आम आदमी की ताकत को कम नहीं आंकना चाहिए. शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ के इस डायलॉग का बहुत गूढ मतलब है. सियासत और सिनेमा के सितारे अक्सर आम आदमी को दोयम दर्जे का समझते हैं. जिन लोगों की वजह से सितारे बने होते हैं, उनको ही जमीन का कीड़ा समझने लगते हैं. लेकिन यही आम आदमी जब अपने पर आ जाता है, तो इन सितारों को पल भर में जमीन दिखा देता है. कितने नेता और अभिनेता आम आदमी की नाराजगी का शिकार हो चुके हैं. इस वक्त बॉलीवुड निशाने पर है. आम आदमी की नाराजगी झेल रही हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की हालत बद से बदतर होती जा रही है. एक के बाद एक बड़े बजट और सितारों की फिल्में फ्लॉप हो रही हैं.

इस फेहरिस्त में आमिर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्‌ढा’ और अक्षय कुमार की ‘रक्षा बंधन’ भी शामिल होने की रहा पर है. इन दोनों फिल्मों का बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन बेहद निराशाजनक है. पहले दिन की तुलना में दूसरे दिन ‘लाल सिंह चड्‌ढा’ के बिजनेस में 40 फीसदी और ‘रक्षा बंधन’ में 30 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है. 180 करोड़ के बजट में बनी ‘लाल सिंह चड्‌ढा’ ने दूसरे दिन 7.26 करोड़ रुपए कमाए हैं. वहीं पहले दिन फिल्म ने 11.70 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था. इस तरह फिल्म दो दिन में 18.96 करोड़ रुपए का ही बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कर पाई है. जो कि उसकी लागत और अनुमान को देखते हुए बहुत ही ज्यादा कम है. इस तरह देखा जाए तो आमिर खान की ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होने की ओर है. फिल्म डिजास्टर साबित हुई तो आमिर खान और करीना कपूर के लिए सदमे से कम नहीं होगा.

हालांकि, इस बात के संकेत बहुत पहले से मिलने शुरू हो गए थे. क्योंकि लोग सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक फिल्म ‘लाल सिंह चड्‌ढा’ के बहिष्कार की मांग करने लगे थे. आए दिन सोशल मीडिया पर बायकॉट लाल सिंह चड्‌ढा और बायकॉट बॉलीवुड ट्रेंड कर रहा था. फिल्म के फ्लॉप होने के संकेत मिलने की वजह से इसकी अभिनेत्री करीना कपूर की अक्ल भी ठिकाने आ गई. वरना ये वही करीना हैं, जिन्होंने बॉलीवुड में नेपोटिज्म के सवाल पर एक समय कहा था कि हम दर्शकों को फिल्म देखने के लिए जबरदस्ती नहीं करते हैं. यदि किसी को फिल्म देखने नहीं जाना है, तो वो मत जाए. करीना ने कहा था, ”’दर्शकों ने ही हमें स्टार बनाया है और वहीं आज हमपर नेपोटिज्म को लेकर अंगुली उठा रहे हैं. आप हमारी फिल्में देखने जाते हो ना? मत जाओ, कोई किसी को फोर्स नहीं करता कि आप हमारी फिल्में देखें. मुझे तो यही लगता है कि ये सारी बहस ही बेवजह है.”

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