अगर पहले समय की बात की जाएं तो महिलाओ को पुरुषो के मामले में काफी कम आका जाता था क्युकी महिलाओ को न तो कही आने जाने की अनुमति थी और लोगो का मानना था की महिलाए सिर्फ चार दिवारी में ही ज्यादा अच्छी लगती हैं लेकिन, धीरे–धीरे समाज ने अपनी सोच को बदला और धीरे–धीरे लड़कियों को हर तरह के अधिकार मिलने लगे। जिससे वो समाज में अपनी एक अलग पहचान बना सके। समय ने इस तरह अपनी करवट बदली की लड़किया हर वो काम करने लगी । जो अधिकतर पुरुष किया करते थे। अगर वर्तमान की बात की जाएं तो कोई भी काम ऐसा नहीं है जो लड़की नही कर सकती हर क्षेत्र में लड़किया अपने नाम के झंडे लहरा रही हैं। और लड़किया पुरुषो के साथ कंधा से कंधा मिला कर चल रही हैं।
आज हम आपको एक ऐसी ही बहादुर लड़की की कहानी बताएंगे। जिसने अपने टैलेंट और मेहनत से देश का नाम रोशन किया वे साथ अपने माता पिता के नाम को भी रोशन किया।आज हम आपको जिसके बारे में बताने जा रहे है उसका नाम बबीता नागर (Babita Nagar) है। जो अपने जज्बे और जुनून से विदेश में भी अपने देश के नाम के झंडे लहरा रही है बबीता जो एक पहलवान (Wrestler Babita Nagar) है जो ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) के सादुल्लापुर गांव की रहनेवाली हैं जिसने अपनी पहलवानी से देश के नाम गोल्ड मेडल किया।
बबीता नागर जो पेशे से ग्रेटर नोएडा में सब इंस्पेक्टर के पद पर है जिन्हे कुश्ती खेलना भी काफ़ी पसंद हैं और जो अपनी नौकरी के साथ लड़कियों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती है वे साथ ही साथ कही अन्य लड़कियों को कुश्ती सीखा कर उन्हे ट्रेनिंग देती है जिसने से कही लड़कियों पुलिस में नौकरी भी पा चुकी हैं।
आपको बता दे की नीदरलैंड (Netherland) में वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स (World Police and Fire Games) का आयोजन किया गया था जिसमे कही अन्य खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था और उनमें बबीता नागर ने भी भाग लिया। जिसमे उन्होंने 68 किलो के भार को उठा कर सामने वाले प्रतियोगी को मात्र 24 सेकंड में हराकर एक नया इतिहास रचा और विदेश में भारत के नाम का गोल्ड मेडल अपने नाम किया। जिसके बाद बबीता ने यह साबित किया की लड़किया भी लड़को से कम नहीं हैं।
**आसान नहीं था यहाँ तक का सफर…
हम हमारे समाज की सोच अच्छे से जानते है क्युकी समाज के लोग लड़कियों को इस क्षेत्र में भेजने से डरते हैं क्युकी लोग का कहना है की लड़किया इस क्षेत्र में अच्छी नहीं लगती। तो बबीता को भी इस तरह की सोच का सामना करना पड़ा। जिसके बाद उन्होंने काफी संघर्ष कर एक सब इंस्पेक्टर का पद हासिल किया जिसके बाद भी उन्होंने कुश्ती करना जारी रखा वे अन्य खेलो में भाग भी लेती रही।
**गांव ने बनाई बेहद खुशी….
आज बबीता ने एक ऐसी जीत हासिल की जिसको सुन इनके गांव वे परिवार के लोगो का खुशी का ठिकाना नही था एक समय वो था जब लोग इनके ऊपर इस चीज को लेकर उंगली उठा रहे थे और आज वही लोग इनकी तारीफ कर नही थक रहे थे। बबीता नागर जिन्होने विदेश में देश का झंडा लहराया। जो एक माता पिता के लिए बेहद गर्व की बात थी जिस खुशी को पूरा गांव वे परिवार का हर एक सदस्य जाहिर कर धाम धाम से नाच रहा हैं।
बबीता ने आज अपने साथ हर उस लड़की को प्रेरित किया हैं जो समाज की सोच से डर कर अपने सपनो को अपने अंदर दबा लेती थी। लेकिन आज उन लड़कियों को बबीता से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में आई हर मुश्किल का सामना कर। खुद को अपनी मंजिल तक पहुंचना पड़ेगा। तो आज हमार देश सलाम करता है ऐसी बेटी को जिसने आज देश का नाम विदेश में भी रोशन किया।
