नई दिल्ली: पिछले कुछ सालों में प्रतियोगी परीक्षाओं में भारत के एक द्वीप के बारे में अक्सर पूछा जाने लगा है. यह ऐसा द्वीप है, जो भारत शासन के अंदर आता है. सरकार यहां जनगणना कराती है. लगभग 60 हजार साल से इंसान रह रहे हैं. लेकिन अगर आप उस द्वीप पर जाना चाहे, तो नहीं जा सकते हैं. कुछ सालों पहले एक अमेरिकी व्यक्ति गया भी था, लेकिन वापस नहीं आ सका.
अंडमान एंड निकोबार का है हिस्सा
हम नार्थ सेंटिनल द्वीप (North Sentinel Island) की बात कर रहे हैं. यह बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडमान द्वीप समूह का एक द्वीप है. यह द्वीप दक्षिण अंडमान जिले के अंतर्गत आता है. लेकिन यहां जाने की किसी को इजाजत नहीं है. इसके पीछे यहां पाए जाने वाली जनजाति बड़ी वजह है. जिसका इस दुनिया से अभी कोई संपर्क नहीं है.
यहां रहती है सेंटिनली जनजाति
इस द्वीप रहने वाली सेंटिनली जनजाति ने आज तक किसी भी बाहरी हमले का सामना नहीं किया. ये लोग छोटे कद होते हैं. रिसर्च के मुताबिक, इनकी बनावट और भाषाई समानताओं के आधार पर जारवा सुमदाय का बताया जाता है. कॉर्बन डेटिंग के जरिए यह भी बताया जाता है कि इस जनजाति की उपस्थिति 2,000 पहले की है. इस बात का भी दावा किया जाता है कि इस द्वीप पर मनुष्य की मौजूदगी 60 हजार साल पहले से है.
नहीं खींच सकते फोटो
भारत सरकार ने जनजातियों को संरक्षित करने के लिए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (आदिवासी जनजातियों का संरक्षण) विनियमन, 1956 जारी किया. इसके बाद से इस क्षेत्र में प्रशासन के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के प्रवेश पर बैन है. यहां तक कि फोटो खींचना या कोई फिल्म बनाना भी कानून जुर्म है. बताया जाता है कि ये लोग बाहरी व्यक्तियों के खिलाफ शुत्रता पूर्ण व्यवहार करते हैं. साल 1991 में आखिरी बार जनजाति के लोगों ने प्रशासन की टीम से कुछ नारियल लिए थे. इसके बाद से कोई खास संपर्क नहीं हुआ.
कितनी लोग हैं रहते इस द्वीप पर
आम भारतीय लोगों की तरह सरकार इन लोगों की भी जनगणना करती है. आखिरी जनगणना साल 2011 में की गई थी, जिसमें 15 सेंटिनली लोगों खोजे गए थे. इसमें तीन महिला और 12 पुरूष थे. हालांकि, अनुमान लगाया जाता है कि इस वक्त द्वीप 40- 400 लोग हो सकते हैं.
