वैज्ञानिकों का अनुमान है कि लगभग 100000 वर्ष पहले पृथ्वी पर बंदर जैसी दिखाई देने वाली इंसान प्रजाति विकसित हुई। पृथ्वी पर मौजूद सभी जीव जंतुओं में केवल इंसान ऐसे हैं जिन्होंने सुरक्षित रहने के लिए और निरंतर विकास करने के लिए कई प्रकार के परिवर्तन किए। सभी जानते हैं हजारों साल पहले इंसान भी जानवरों की तरह जंगल में रहते थे। बाद में उसने समूह में रहना शुरू किया और फिर बस्तियां बनाई गई। क्या आप जानते हैं भारत की पहली बस्ती यानी पहला गांव कौन सा था।

यह दावा किया जाता है कि भारत का पहला गाँव पट्टाराई पेरम्बुदुर है, जो दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु में चेन्नई शहर से 55 किमी दूर स्थित है। इंसानों ने सबसे पहले अपने घर यहीं (गुफाओं में रहने से पहले) बनाए। पुरातत्व विभाग के सर्वेक्षण ने प्रमाणित किया है कि इस गाँव में लगभग 30000 वर्षों से मानव बस्ती है, जबकि दुनिया के कई क्षेत्र, कई राज्य, कई विकसित सभ्यताएँ प्राकृतिक आपदाओं के कारण नष्ट हो चुकी हैं।

पुरातत्वविदों का कहना है कि हाल ही में हुई खुदाई में कुछ ऐसी कलाकृतियां मिली हैं जो 30,000 साल पुरानी हैं। खुदाई 2015 में भी की गई थी, जिसके दौरान पाषाण युग और स्वर्गीय पाषाण युग (30,000 ईसा पूर्व-10,000 ईसा पूर्व) और लौह युग से लौह वस्तुएं और पत्थर की वस्तुएं साइट पर मिली थीं। अर्थात गाँव पृथ्वी का वह भाग होता है जहाँ विपदाओं के कारण सम्पत्ति का नाश होता था, परन्तु मनुष्यों ने घरों का पुनर्निर्माण किया और गाँवों को बसाया।

पत्तरई पेरमबुदूर में 30 हज़ार सालों से लोग रह रहे हैं

पूर्व एएसआई अधीक्षक पुरातत्वविद् डॉ. टी सत्यमूर्ति राज्य के पुरातत्वविदों से सहमत हैं और कहते हैं, “पट्टराई पेरम्बुदुर में 30,000 वर्षों से लोगों के रहने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। पुरातत्व विभाग के जानकारों का कहना है कि इस बात के भी सबूत हैं कि करीब 75,000 साल पहले यहां की गुडियम गुफाओं में इंसान रहा करते थे। यानी तमाम प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद मानव नियमित रूप से पृथ्वी के भू-भाग पर निवास करता है। यही कारण है कि इसे दुनिया का सबसे पुराना गांव भी कहा जाता है।

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