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बोल-सुन नहीं सकते, किसी से मदद नहीं मांगते: गोलगप्पे का ठेला लगा कर अपनी आजीविका चलाता है

एक दिव्यांग की लाइफ़ कितनी मुश्किल होती है, इसका हम अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते. कोई उन्हें दया की दृष्टि से देखता है तो कोई हीन दृष्टि से. कई दिव्यांगों…

‘कोई काम छोटा नहीं होता’, इसी सोच के साथ पढ़ाई करने के लिए गोलगप्पे बेच रही हैं मोहाली की पूनम

जीवनयापन के लिए हम कोई भी काम उठा लेते हैं. सभी की जीवनशैली अलग है और संघर्ष भी. एक्स्ट्रा पॉकेट मनी के लिए हमने भी पड़ोसियों के काम में मदद…