उद्देश्य सचान (Uddeshya Sachan) ने ज़िंदगी भर अपने पिता को अपनी स्कूल की फ़ीस भरने के लिए कड़ी मेहनत करते देखा. बस इसी बात से प्रेरित होकर उन्होंने कानपुर के कई ग़रीब व ज़रूरतमंद बच्चों का भविष्य बनाने की ठानी और उनको फ़्री में पढ़ाना शुरू कर दिया. आज वो कानपुर के ‘गुरुकुलम स्कूल’ में 150 से ज़्यादा बच्चों को शिक्षा के ज़रिए समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का काम कर रहे हैं.
दरअसल, कानपुर में रहने वाले उद्देश्य सचान को छोटी उम्र में ही कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. कभी पिता को अपनी स्कूल फ़ीस भरने के लिए संघर्ष करते देखा तो कभी बीमारियों से तंग आते परिवार को. लेकिन उद्देश्य सचान ने कड़ी मेहनत की और अपने हर एग्ज़ाम में टॉप किया. इतनी मेहनत करने के बादजूद उनका न तो सरकारी न ही किसी प्राइवेट कंपनी में सिलेक्शन हो पाया. इस वजह से उन्हें कभी ढाबों पर तो आइस फ़ैक्ट्रियों में काम काम करना पड़ा. बावजूद इसके वो अपने मक़सद में लगे रहे.
फ़ैक्ट्रियों में छोटी मोटी नौकरी करने के दौरान उद्देश्य सचान कुछ अलग करने की ठानी और अपनी शिक्षा को समाज के काम लाने की योजना बनाई. उद्देश्य को एहसास हुआ कि शहर में उनके जैसे कई ग़रीब बच्चे हैं, जो झुग्गी बस्तियों में रहते हैं. लेकिन ग़रीबी की वजह से स्कूल नहीं जा पाते. ग़रीबी और शिक्षा की कमी के चलते उन्हें अक्सर बीमारियों का सामना करना पड़ता है. जो थोड़ा बहुत पढ़े लिखे भी हैं वो बेरोज़गारी से जूझ रहे हैं. ऐसे में उन्होंने ग़रीब बच्चों की बुनियादी ढांचे पर काम करने और एक स्कूल खोलने का फ़ैसला किया.

5 ग़रीब बच्चों को मुफ़्त में पढ़ाने से की शुरुआत
उद्देश्य सचान (Uddeshya Sachan) ने साल 2019 में 9वीं और 10वीं क्लास के 5 बच्चों को मुफ़्त में कोचिंग देने से अपने इस मिशन की शुरुआत की थी. इसके बाद धीरे-धीरे झुग्गी झोपड़ियों के बच्चों को भी पढ़ाना शुरू किया. ऐसा करते हुए 5 बच्चों से 10 बच्चे फिर 10 से 70 बच्चे हो गए. इन सभी बच्चों को उद्देश्य बिना कोई फ़ीस लिए पढ़ाते थे. साल 2021 में उन्होंने एक कमरा किराए पर लेकर ‘गुरुकुलम- ख़ुशियों वाला स्कूल’ की शुरुआत की थी. आज इस स्कूल में 150 ग़रीब छात्र पढ़ाई कर रहे हैं जिन्हें 3 टीचर्स पढ़ाते हैं.
बातचीत में उद्देश्य ने बताया
‘मैं पिछले 4 सालों से ‘गुरूकुलम-ख़ुशियों वाला स्कूल’ नाम का विद्यालय चला रहा हूं. इस स्कूल में 150 अभावग्रस्त और झुग्गी-झोपड़ी के बच्चे नि:शुल्क पढ़ रहे हैं. मेरे जैसे साधारण से व्यक्ति के लिए स्कूल खोलना कोई आसान काम नहीं था. यहां तक का सफ़र मेरे लिए काफ़ी मुश्किलों भरा था’.
