मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सतना जिले के चित्रकूट में स्थित सिद्धा पहाड़ को लेकर राजनीति हो रही के बाद खुद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने साफ कर दिया है कि अब वहां कोई काम नहीं किया जाएगा. बता दें कि धार्मिक महत्व वाले इस पहाड़ को कुछ ठेकेदार मिनरल निकालने के लिए ठेके पर लेना चाहते थे, जिसको लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है, मैहर विधानसभा से बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी इस पहाड़ को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ हैं. दरअसल चित्रकूट में एक आश्रम है जिसका नाम सरभंगा आश्रम है, वहीं आश्रम के सामने ही एक पहाड़ है, जिसको सिद्धा पहाड़ कहा जाता है.
अपनी पार्टी से नाराज बीजेपी विधायक
चित्रकूट विधानसभा के पास की विधानसभा मैहर से बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी नाराज हैं. तीन बार सीएम से मिलने का समय मांगने के बाद भी जब समय नहीं मिल पाया तो अब वह आर पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं, उन्होंने साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर इस धार्मिक महत्त्व वाले पहाड़ को खोदने नहीं देंगे.
इसको लेकर उन्होंने प्रदेश के सभी साधु संतों से आव्हान किया है कि जिस दिन उसकी सुनवाई हो उस दिन सभी इकट्ठा हो और इसका विरोध करें. धार्मिक महत्व वाले पवित्र सिद्धा पहाड़ पर खनन की अनुमति की तैयारियों की जानकारी के बाद क्षेत्र में विरोध के स्वर गूंजने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे ऐसा होने नहीं देंगे.
मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सतना जिले के चित्रकूट में स्थित सिद्धा पहाड़ को लेकर राजनीति हो रही के बाद खुद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने साफ कर दिया है कि अब वहां कोई काम नहीं किया जाएगा. बता दें कि धार्मिक महत्व वाले इस पहाड़ को कुछ ठेकेदार मिनरल निकालने के लिए ठेके पर लेना चाहते थे, जिसको लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है, मैहर विधानसभा से बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी इस पहाड़ को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ हैं. दरअसल चित्रकूट में एक आश्रम है जिसका नाम सरभंगा आश्रम है, वहीं आश्रम के सामने ही एक पहाड़ है, जिसको सिद्धा पहाड़ कहा जाता है.
इस पहाड़ के बारे में बताया जाता है कि यह ऋषि मुनियों की अस्थियों का पहाड़ है और इसी पहाड़ को देखकर वनवास के समय भगवान राम ने प्रण लिया था कि वह पृथ्वी को निशाचरों से मुक्त कर देंगे. अब इस पहाड़ को खोदने को लेकर दावे और आपत्तियां का दौर शुरू हो गया है.
अपनी पार्टी से नाराज बीजेपी विधायक
चित्रकूट विधानसभा के पास की विधानसभा मैहर से बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी नाराज हैं. तीन बार सीएम से मिलने का समय मांगने के बाद भी जब समय नहीं मिल पाया तो अब वह आर पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं, उन्होंने साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर इस धार्मिक महत्त्व वाले पहाड़ को खोदने नहीं देंगे.
इसको लेकर उन्होंने प्रदेश के सभी साधु संतों से आव्हान किया है कि जिस दिन उसकी सुनवाई हो उस दिन सभी इकट्ठा हो और इसका विरोध करें. धार्मिक महत्व वाले पवित्र सिद्धा पहाड़ पर खनन की अनुमति की तैयारियों की जानकारी के बाद क्षेत्र में विरोध के स्वर गूंजने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे ऐसा होने नहीं देंगे.
क्या है धार्मिक मान्यता?
मान्यता है कि भगवान राम 14 साल के वनवास के दौरान चित्रकूट पहुंचे थे. उन्होंने वहां पर 11 साल का समय व्यतीत किया था और इस पहाड़ को देखकर उन्होंने इसके बारे में पूछा था तो उनको बताया गया था कि यह ऋषि मुनियों की हड्डियों का पहाड़ है.
राक्षसों ने उनका वध कर इस स्थान पर उनकी हड्डियों को फेकना शुरू किया, जिससे यह पहाड़ बन गया. बताया जाता है कि इसके बाद भगवान राम ने प्रण लिया था कि वह पृथ्वी को निशाचरों से मुक्त कर देंगे. वहीं अब इस पहाड़ की खुदाई कर इसके खनिज को निकालने के लिए दावे आपत्तियां जारी की जा रही हैं.
मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर इस धार्मिक महत्त्व वाले पहाड़ की खुदाई नहीं होने देंगे. 30 सितंबर को दावे आपत्तियों पर सुनवाई है, इसको लेकर नारायण त्रिपाठी एक बड़ा आंदोलन करने वाले हैं और सैकड़ों की संख्या में साधु संत ऋषि-मुनियों और स्थानीय लोगों को लेकर एक पहाड़ खुदाई की अनुमति नहीं देने की मांग करने वाले हैं.
कांग्रेस ने शिवराज सरकार को घेरा
वह इस मामले में कांग्रेस बीजेपी पर हमलावर हो गई है, उन्होंने साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर धार्मिक महत्व वाले इस पहाड़ की खुदाई नहीं करने देगी. कमलनाथ ने एक ट्वीट करते हुए सरकार पर हमला बोला है- उनका कहना है कि खुद को धर्म प्रेमी बताने वाली शिवराज सरकार को व्यवसायिक हितों के लिए लगातार धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है. कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी. जन आस्थाओं के विरोधी इस निर्णय के विरोध में कांग्रेस सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ेगी. वहीं मामला तूल पकड़ते देख सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी की भी आस्थाओं पर कुठाराघात नहीं होगा.
आस्था के केंद्र इस सिद्धा पहाड़ को खोदने के लिए मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लोक सुनवाई करने का निर्णय लिया गया है. यह वह पहाड़ है. जिसका उल्लेख रामचरित मानस और वाल्मीकि रामायण में भी है कि राक्षसों द्वारा ऋषि मुनियों का वध करने के बाद उनके अस्थि समूह से बने ढेर से यह पहाड़ बना है.
कांग्रेस का कहना है कि भगवान राम के नाम का राजनीति के लिये इस्तेमाल करने वाली बीजेपी सरकार अब उनके अवशेषों को सुनियोजित तरीके से नष्ट करने का काम कर रही है. कांग्रेस इस पर चुप नहीं बैठेगी. जन आस्थाओं के विरोधी इस निर्णय के विरोध में हम सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ेंगे और भगवान श्री राम की यादों से जुड़े इस पहाड़ को नष्ट और खत्म नहीं होने देंगे.
इस मामले में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का बयान सामने आया है. नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है साथ ही कहा है कि यह मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में है मैं भी मुख्यमंत्री से बात करूंगा. किसी की भी आस्थाओं पर कुठाराघात नहीं हो रहा है, इस बात का ध्यान रखा जाएगा.
वहीं बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी का कहना है कि उनकी नाराजगी सरकार से नहीं हैं ये, हमारे राम का इश्यू है. रामचरित्र मानस में बड़ा उल्लेख है कि रामजी के 14 साल के वनवास के दौरान 11 साल उन्होंने चित्रकूट में बिताया.
उन्होंने आगे कहा कि चित्रकूट की उपेक्षा का दंश तो हम लोग ही रहे हैं, मैं अंतरराष्ट्रीय साधु संत महात्मा, कथावाचकों से प्रार्थना करूंगा.
उनका कहना है कि पहाड़ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकार को उसके बारे में देखना चाहिए . उस पहाड़ को किसी की व्यक्तिगत हित और लाभ के लिए दे दिया जाए कि आप मिनरल निकालो तो वहां के लोग इसको किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं करेंगे.
नारायण त्रिपाठी का कहना है कि यह खदान पहले किसी के नाम पर भी रही हो, लेकिन ये एकदम अचानक से सुर्खियों में आयी है, इसलिए NOC मांगी जाने लगी है, 30 सितंबर को सुनवाई की डेट लग गई है. मैं पदयात्रा करूंगा. 30 सितंबर की सुनवाई के दिन हम लोग सामूहिक रूप से इकट्ठा होंगे. इस खदान को स्वीकृत नहीं होने देंगे.
मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सतना जिले के चित्रकूट में स्थित सिद्धा पहाड़ को लेकर राजनीति हो रही के बाद खुद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने साफ कर दिया है कि अब वहां कोई काम नहीं किया जाएगा. बता दें कि धार्मिक महत्व वाले इस पहाड़ को कुछ ठेकेदार मिनरल निकालने के लिए ठेके पर लेना चाहते थे, जिसको लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है, मैहर विधानसभा से बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी इस पहाड़ को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ हैं. दरअसल चित्रकूट में एक आश्रम है जिसका नाम सरभंगा आश्रम है, वहीं आश्रम के सामने ही एक पहाड़ है, जिसको सिद्धा पहाड़ कहा जाता है.
इस पहाड़ के बारे में बताया जाता है कि यह ऋषि मुनियों की अस्थियों का पहाड़ है और इसी पहाड़ को देखकर वनवास के समय भगवान राम ने प्रण लिया था कि वह पृथ्वी को निशाचरों से मुक्त कर देंगे. अब इस पहाड़ को खोदने को लेकर दावे और आपत्तियां का दौर शुरू हो गया है.
अपनी पार्टी से नाराज बीजेपी विधायक
चित्रकूट विधानसभा के पास की विधानसभा मैहर से बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी नाराज हैं. तीन बार सीएम से मिलने का समय मांगने के बाद भी जब समय नहीं मिल पाया तो अब वह आर पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं, उन्होंने साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर इस धार्मिक महत्त्व वाले पहाड़ को खोदने नहीं देंगे.
इसको लेकर उन्होंने प्रदेश के सभी साधु संतों से आव्हान किया है कि जिस दिन उसकी सुनवाई हो उस दिन सभी इकट्ठा हो और इसका विरोध करें. धार्मिक महत्व वाले पवित्र सिद्धा पहाड़ पर खनन की अनुमति की तैयारियों की जानकारी के बाद क्षेत्र में विरोध के स्वर गूंजने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे ऐसा होने नहीं देंगे.
क्या है धार्मिक मान्यता?
मान्यता है कि भगवान राम 14 साल के वनवास के दौरान चित्रकूट पहुंचे थे. उन्होंने वहां पर 11 साल का समय व्यतीत किया था और इस पहाड़ को देखकर उन्होंने इसके बारे में पूछा था तो उनको बताया गया था कि यह ऋषि मुनियों की हड्डियों का पहाड़ है.
राक्षसों ने उनका वध कर इस स्थान पर उनकी हड्डियों को फेकना शुरू किया, जिससे यह पहाड़ बन गया. बताया जाता है कि इसके बाद भगवान राम ने प्रण लिया था कि वह पृथ्वी को निशाचरों से मुक्त कर देंगे. वहीं अब इस पहाड़ की खुदाई कर इसके खनिज को निकालने के लिए दावे आपत्तियां जारी की जा रही हैं.
मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर इस धार्मिक महत्त्व वाले पहाड़ की खुदाई नहीं होने देंगे. 30 सितंबर को दावे आपत्तियों पर सुनवाई है, इसको लेकर नारायण त्रिपाठी एक बड़ा आंदोलन करने वाले हैं और सैकड़ों की संख्या में साधु संत ऋषि-मुनियों और स्थानीय लोगों को लेकर एक पहाड़ खुदाई की अनुमति नहीं देने की मांग करने वाले हैं.
कांग्रेस ने शिवराज सरकार को घेरा
वह इस मामले में कांग्रेस बीजेपी पर हमलावर हो गई है, उन्होंने साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर धार्मिक महत्व वाले इस पहाड़ की खुदाई नहीं करने देगी. कमलनाथ ने एक ट्वीट करते हुए सरकार पर हमला बोला है- उनका कहना है कि खुद को धर्म प्रेमी बताने वाली शिवराज सरकार को व्यवसायिक हितों के लिए लगातार धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है. कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी. जन आस्थाओं के विरोधी इस निर्णय के विरोध में कांग्रेस सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ेगी. वहीं मामला तूल पकड़ते देख सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी की भी आस्थाओं पर कुठाराघात नहीं होगा.
खुद को धर्मप्रेमी बताने वाली शिवराज सरकार अपने व्यावसायिक हितों के लिये लगातार धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ वाले निर्णय लेती आयी है.
आस्था के केंद्र इस सिद्धा पहाड़ को खोदने के लिए मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लोक सुनवाई करने का निर्णय लिया गया है. यह वह पहाड़ है. जिसका उल्लेख रामचरित मानस और वाल्मीकि रामायण में भी है कि राक्षसों द्वारा ऋषि मुनियों का वध करने के बाद उनके अस्थि समूह से बने ढेर से यह पहाड़ बना है.
कांग्रेस का कहना है कि भगवान राम के नाम का राजनीति के लिये इस्तेमाल करने वाली बीजेपी सरकार अब उनके अवशेषों को सुनियोजित तरीके से नष्ट करने का काम कर रही है. कांग्रेस इस पर चुप नहीं बैठेगी. जन आस्थाओं के विरोधी इस निर्णय के विरोध में हम सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ेंगे और भगवान श्री राम की यादों से जुड़े इस पहाड़ को नष्ट और खत्म नहीं होने देंगे.
इस मामले में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का बयान सामने आया है. नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है साथ ही कहा है कि यह मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में है मैं भी मुख्यमंत्री से बात करूंगा. किसी की भी आस्थाओं पर कुठाराघात नहीं हो रहा है, इस बात का ध्यान रखा जाएगा.
वहीं बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी का कहना है कि उनकी नाराजगी सरकार से नहीं हैं ये, हमारे राम का इश्यू है. रामचरित्र मानस में बड़ा उल्लेख है कि रामजी के 14 साल के वनवास के दौरान 11 साल उन्होंने चित्रकूट में बिताया.
भारत कर्म प्रधान देश है कर्म की पूजा होती है, गीता में लिखा है कि राम कर्म करके ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम बने. राम का जन्म अयोध्या में हुआ अयोध्या का भव्यतम विकास होना चाहिए लेकिन चित्रकूट धाम जो है उसका अयोध्या से भी भव्य विकास किया जाना चाहिए. पर आज भी लगातार उपेक्षित है.
उन्होंने आगे कहा कि चित्रकूट की उपेक्षा का दंश तो हम लोग ही रहे हैं, मैं अंतरराष्ट्रीय साधु संत महात्मा, कथावाचकों से प्रार्थना करूंगा.
उनका कहना है कि पहाड़ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकार को उसके बारे में देखना चाहिए . उस पहाड़ को किसी की व्यक्तिगत हित और लाभ के लिए दे दिया जाए कि आप मिनरल निकालो तो वहां के लोग इसको किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं करेंगे.
नारायण त्रिपाठी का कहना है कि यह खदान पहले किसी के नाम पर भी रही हो, लेकिन ये एकदम अचानक से सुर्खियों में आयी है, इसलिए NOC मांगी जाने लगी है, 30 सितंबर को सुनवाई की डेट लग गई है. मैं पदयात्रा करूंगा. 30 सितंबर की सुनवाई के दिन हम लोग सामूहिक रूप से इकट्ठा होंगे. इस खदान को स्वीकृत नहीं होने देंगे.
मेरी मुख्यमंत्री और सब से प्रार्थना है कि इस स्थान को किसी भी तरह स्वीकृत नही करें अन्यथा विंध की जनभावनाओं का अपमान कहलाएगा. राम का अपमान कहलाएगा और साधु संतों का अपमान कहलाएगा और ये लड़ाई बड़ी ताकत के साथ लड़ेंगे. मैंने मुख्यमंत्री जी से बात करने के लिए तीन बार समय मांगने का प्रयास किया, लेकिन मुझे नहीं मिल पाया. जब मुझे समय नहीं मिला तो मुझे इस काम को तत्काल में रोकना पड़ेगा.
वहीं कमलनाथ के मीडिया को-आर्डीनेटर नरेंद्र सलूजा ने कहा कि शिवराज सरकार जो खुद को धर्म पर भी बनाती है वह लगातार धर्म विरोधी निर्णय लेती रहती है. जन भावनाओं के विपरीत निर्णय लेती रहती है, जिले में जो राम वन गमन पथ पर स्थित सिद्ध पहाड़ है, जिसका राम चरित्र मानस में उल्लेख है, जहां पर भगवान राम ने प्रतिज्ञा ली थी उस पहाड़ को खोदने के लिए अनुमति देने की प्रक्रिया की जा रही है.
यह वह पहाड़ है, जो भगवान यहां से गुजरे थे और उन्होंने इस पहाड़ के बारे में पूछा था तो उनको बताया गया था कि राक्षसों ने ऋषि-मुनियों का वध कर उनकी अस्थियों को यहां पर फेंकना शुरू किया था, जिसकी बाद यह पहाड़ बना तो भगवान ने प्रतिज्ञा ली थी और राक्षसों का नरसंहार किया था.
वहीं कांग्रेस के आरोप पर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि यह कांग्रेस की आपत्ति नहीं है, भ्रम पैदा करने की उनकी आदत है.
