चलिए, आपको मिलाते हैं देश की सबसे बुज़ुर्ग लेकिन ज़िंदादिल किसान पप्पामल अम्मा से.
इस साल जब पद्म पुरुस्कारों की घोषणा हुई, तो उसमें एक नाम पप्पामल अम्मा का भी था. तमिलनाडु में नीलगिरी की तलहटी के पास भवानी के तट पर थेक्कमपट्टी गांव की रहने वाली हैं पप्पामल. उन्हें पद्मश्री मिलने की घोषणा के बाद से ही कई लोग उन्हें बधाई देने पहुंचे, जिनमें एक नाम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी था.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के साथ एक बातचीत में उन्होंने कहा कि वह अभी भी 2.5 एकड़ में खेती करती हैं. इस खेत में वो बाजरा, केले और भिंडी सहित अलग-अलग फ़सलें उगाती हैं.

कैसे शुरू होता है पप्पामल अम्मा का दिन?
वो रोज़ सुबह 5.30 बजे वो उठती हैं और 6 बजे तक खेतों में पहुंच जाती हैं. वो सिर्फ़ किसान नहीं हैं बल्कि तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय की सलाहकार समिति का एक हिस्सा भी हैं. वो कृषि से जुड़े कई सम्मेलनों में भाग लेती हैं और जैविक खेती पर लेक्चर भी देती हैं. उन्होंने राजनीति में भी दबदबा बनाया, और थेक्कमपट्टी पंचायत के पूर्व वार्ड सदस्य और करमादई पंचायत संघ में पार्षद के रूप में चुनी गईं.

पप्पामल के फ़ैन्स DMK नेता स्टालिन से लेकर पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण भी हैं. जिस वक़्त उन्हें पद्मश्री सम्मान मिला, उस वक़्त लक्ष्मण ने ट्वीट किया:

“आयु केवल एक संख्या है। 105 वर्षीय पप्पामल जैविक कृषि में एक किंवदंती है. वह थेक्कमपट्टी, तमिलनाडू में अपने क्षेत्र में काम करती है और 2.5 एकड़ की जमीन पर बाजरा, दाल और सब्जियों की खेती करती है एक प्रोविजन स्टोर और भोजनालय चलाती हैं.” प्रधानमंत्री मोदी भी अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में उनके जज़्बे की तारीफ़ कर चुके हैं.

इतनी सराहना और लोक्रप्रियता के बावजूद पप्पामल बेहद सरल महिला हैं. अपनी तारीफ़ सुनने पर वो सिर्फ़ तमिल में लोगों को धन्यवाद कहती हैं. उन्हें पता है कि शब्दों से ज़्यादा उनका काम बोलता है

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