इंडिपेंडेंट फिल्मों के जरिए अपनी मजबूत पहचान बनाने वाले डायरेक्टर पैन नलिन की फिल्म ‘द छेलो शो’ इन दिनों चर्चा में है. फिल्म को इंडिया की तरफ से ऑस्कर की ऑफिसियल एंट्री के लिए भेजा गया है. पैन ने जिस गरीबी को नजदीक से देखा, जिसके साये में वह पले-बढ़े आज वह उसी गरीबी को पर्दे तक ले आए हैं. इस फिल्म के लिए उन्होंने मुख्य बाल कलाकार भी एक ऐसे बच्चे को चुना जिसके पिता ट्रक ड्राइवर हैं.

गरीब परिवार में जन्में ‘पैन नलिन’

पैन ने आजतक से बात करते हुए बताया कि उनके पिता स्टेशन के पास चाय का स्टॉल लगाते थे. आज भी उनके पिता वहीं काम करते हैं. इनके पिता के एक टी-स्टॉल से सात लोगों का पेट भरता था. पैन के लिए उनकी मां ने भी बहुत त्याग किया. उन्होंने पैन को पढ़ाने के लिए अपना मंगलसूत्र तक बेच दिया. पैन की नई फिल्म भी उसी गरीबी को दर्शाती है. इसके साथ ही ऑस्कर की दौड़ में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही पैन की फिल्म के मुख्य किरदार भाविन का बचपन भी मुश्किल दौर से गुजरा.

पिता ड्राइवर हैं

भाविन ने आजतक से कहा, “जब वह स्कूल में थे तो उस दौरान चार-पांच लोग उनके स्कूल आए थे. उन्होंने क्लास में सभी से पूछा कि आपके फेवरेट हीरो कौन है. इस पर सिर्फ भाविन ही थे जिन्होंने जवाब दिया कि वह टाइगर श्रॉफ और अमिताभ बच्चन को पसंद करते हैं. इसके बाद उनसे गधा, बंदर जैसी आवाज निकालने के लिए कहा गया. इसके बाद भाविन से उनका नंबर लिया गया और कहा गया कि वह अपने बाल न कटवाएं. इसके कुछ ही दिन बाद घर पर प्रिसिंपल का फोन आया कि हमें एक रेजॉर्ट में जाना है.

माता-पिता थे एक्टिंग के खिलाफ

भाविन के पिता एक ड्राइवर और मां गृहणी हैं. भाविन दो दिन के लिए रेजॉर्ट गए. इसके बाद उन्हें कास्टिंग डायरेक्टर जैकी की तरफ से कॉल आया और उन्हें तीन महीने के लिए बुलाया गया. भाविन के माता-पिता इससे खुश नहीं थे. उन्होंने बोल दिया था कि उसे इस लाइन में नहीं जाना है.

इसके बाद जामनगर से 15 किलोमिटर दूर स्थित भाविन के गांव वसई के रहने वाले उनके एक एक अंकल ने उनके पापा-मम्मी को समझाया कि इसे भेज दो. पापा-मम्मी और चाचा सब मान गए. परिवार वाले मम्मी को बोलते थे कि क्या तुम बेटे को ऐसी गंदी जगह भेज रहे हो, लेकिन मां कहती, कोई नहीं… मेरे दो बच्चे हैं, एक चला गया तो दूसरा है. मैं इसको आगे बढ़ाऊंगी.’

भाविन क्लास 8 में हैं. जब इस फिल्म की शूटिंग शुरू हुई थी तब वह पांचवी में थे. तब वह स्कूल में फर्स्ट आते थे. सांतवी में वह सेकेंड आए तो क्लास में लड़के बोलने लगे कि, फिल्म में जा रहा था न इसलिए तुमको दूसरा स्थान मिला. एक्टिंग में आने के बाद जब भाविन अपने दोस्तों संग क्रिकेट खेलने जाते तो वहां दूसरे लोग उनके साथ फोटो खिंचवाने वाते. भाविन के दोस्त उन्हें हीरो बोलने लगे हैं.

भाविन ने अपनी’पहली फीस घरवालों को दे दी. इस पर घर वालों ने कहा कि- तुम्हें जो चीज चाहिए, वो खरीद लो. इस पर भाविन ने एक साइकिल ले ली और बाकी बचे पैसे पिता को दे दिए. भाविन कहते हैं, उन्हें एक्टिंग करनी है. हर जगह से उन्हें फोन आते हैं और फिल्मों के लिए.

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