भारतीय परिपेक्ष्य में काल्पनिक भाषा का निर्माण बहुत ही कम देखा गया है। अधिकांश प्रयास बचकाने हैं, जैसे हमारे कुछ परग्रहवासी चरित्र काल्पनिक भाषा के नाम पर आईंग, जायींग, खायींग, देखींग, आदि बोलकर परग्रही कम शोले के पानी की टंकी पर चढ़े वीरु अधिक लगते हैं।
ऐसे में मिथक कथा रचते हुए कृत्रिम भाषा का निर्माण का एक महत्त्वपूर्ण स्तम्भ ‘बाहुबली’ में देखने को मिलता है। बाहुबली में कालकेय जनजाति की भाषा किळिकि एक काल्पनिक भाषा है, जिसे मदन कार्की वैरामुत्तु ने रची है।

कार्की युनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड से कम्प्यूटर साइंस में पीएचडी हैं। ऑस्ट्रेलिया में अपने अध्ययन के साथ बेबीसिटर का काम करते हुए कार्की ने क्लिक (click) नाम की भाषा को बच्चों के साथ बातचीत करने के लिए रची। इसमें ध्वन्यात्मक चटकारे (Verbal clicks — यथा, पिच्च से थूकने में पिच्च की ध्वनि) भी सम्मिलित हैं। अतः इस भाषा में अंग्रेजी, तमिऴ, संस्कृत, हिन्दी, आदि के शब्दों की बालभाषा भी झलकती है, यथा सात को seven (सेवन) न कह कर (से हटाकर) विनो; तीन को मोवो (तमिऴ மூன்று मुण्ड्रु) के निकट का, नौ को नमो (नवम् से), दस को तमो (दशम् से) रचा प्रतीत होता है। आठ के लिए रेनो (तमिऴ இரண்டு इरण्डु — दो) का तद्भव रूप दिखता है।

इसी भाषा को आधार बनाते हुए १२ स्वरों, २२ व्यञ्जनों, तथा पाँच ध्वन्यात्मक चटकारे (*क्ले, *त्त, *थे, *र्रऽ, क्वे) भी हैं।

कार्की ने ७५० शब्दों तथा ४० व्याकरण के नियमों वाली किळिकि की रचना की है। इस भाषा में पछतावे के भाव वाले शब्द भी नहीं, क्योंकि किळिकिभाषी यह भाव प्रदर्शित ही नहीं करते। इस भाषा में विलोम शब्द ध्वनियों को उलट उच्चारण कर बनाते हैं। जैसे मिन (मैं) को पलट कर निम (तुम) बनाना।

इसी प्रकार दिशाओं के नामों में मीकी (उत्तर), कीमी (दक्षिण), रैनै (पूर्व), नैरे (पश्चिम), कीनै (दक्षिणपश्चिम), मीनै (उत्तरपश्चिम), कीरै (दक्षिणपूर्व), तथा मीरै (उत्तरपूर्व) हैं, मीक (ऊपर) एवं कीम (नीचे) जोड़कर दस दिशाएँ हैं, जिनके मध्य-केन्द्र को ईपे कहते हैं। ऊपर किळिकि की आधिकारिक वेबसाइट से लिए इस चित्र में इस भाषा की लिपि भी देखी जा सकती है। इस वेबसाइट का लिंक इस आलेख के अन्त में सन्दर्भ में दिया गया है।

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