छुट्टी, एक ऐसा शब्द जिसका नाम सुनते ही हर किसी के मुंह पर अनायास ही एक ख़ुशी झलक पड़ती है। ख़ुशी हो भी क्यों न? भाग-दौड़ भरी इस जिंदगी में छुट्टी किसे नहीं प्यारी होती। भारत में तो आये दिन किसी न किसी कारण छुट्टियाँ आती ही रहती हैं।

लेकिन एक छुट्टी है जो शायद किसी कारण नहीं आती। रविवार की छुट्टी। जी हाँ, रविवार की छुट्टी का इंतजार तो सबको रहता है। और रविवार के दिन किये जाने वाले कामों की लिस्ट पहले ही तैयार कर ली जाती है। पर ये रविवार की छुट्टी आई कहाँ से? सोचा है कभी? नहीं सोचा? तो कोई बात नहीं आज हम आपको रविवार की छुट्टी का इतिहास बताने वाले हैं की क्यों होती है रविवार को छुट्टी।

संडे, मतलब छुट्टी (Sunday Holiday) का दिन। अब तो बहुत सारी कंपनियों में शनिवार को भी छुट्टी रहने लगी है। इसी बीच ऐसी कंपनियों की भी कमी नहीं है जो हफ्ते में सिर्फ 4 दिन काम की बात कर रही हैं यानी 3 दिन छुट्टी मिलेगी। अधिकतर कर्मचारी भी इस पक्ष में हैं। अब सवाल ये है कि आखिर छुट्टियों का ये सिलसिला शुरू कब हुआ, क्योंकि शुरुआती दिनों में तो किसी को छुट्टी नहीं मिलती थी। पुराने समय में तो भारत में ऐसी कोई छुट्टी नहीं थी। जब अंग्रेज भारत आए तब भी भारतीयों से सातों दिन मजदूरों की तरह काम कराया जाता था। आइए जानते हैं आखिर रविवार की छुट्टी की शुरुआत कब और क्यों (Sunday Holiday History) हुई।

कब से शुरू हुई रविवार की छुट्टी?

वैसे तो इस बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है, लेकिन माना जाता है कि भारत में ट्रेड यूनियन मूवमेंट के पिता कहे जाने वाले नारायण मेघाजी लोखंडे के चलते रविवार की छुट्टी मिलनी शुरू हुई। अंग्रेजों के शासन में भारत में अधिकतर मजदूर सातों दिन काम किया करते थे। इसकी वजह से उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता था। कई जगह तो मजदूरों को खाना तक खाने के लिए पर्याप्त वक्त नहीं दिया जाता था। मेघाजी लोखंडे ने इसके खिलाफ आवाज उठाई और मजबूत होकर 10 जून 1890 को अंग्रेजी हुकूमत ने रविवार के दिन छुट्टी घोषित की।

रविवार को ही छुट्टी क्यों?

अगर मान लें कि मेघाजी लोखंडे के प्रयासों के चलते रविवार की छुट्टी शुरू हुई, तो भी ये सवाल उठता है कि आखिर छुट्टी के लिए रविवार को ही क्यों चुना गया। दरअसल, रविवार को ही छुट्टी के लिए इस वजह से चुना गया, क्योंकि उस दिन अंग्रेजों की छुट्टी रहा करती थी। रविवार को अंग्रेज चर्च जाते थे। ऐसे में जब हफ्ते में एक दिन छुट्टी देने की बात आई तो अंग्रेजों ने रविवार को सबकी छुट्टी करने का फैसला किया।

कई देशों में नहीं होती है रविवार की छुट्टी

आज भी कई ऐसे देश हैं, जहां पर रविवार की छुट्टी नहीं होती है। यह इस्लामिक देश हैं, क्योंकि वह शुक्रवार को नमाज अदा करते हैं। ऐसे में वह रविवार की जगह शुक्रवार को छुट्टी करते हैं। अधिकतर पश्चिमी देशों में रविवार को ही छुट्टी होती है। अमेरिका, कनाडा, चीन, फिलीपीन्स और दक्षिणी अमेरिका में रविवार को छुट्टी रहती है और इस दिन लोग चर्च जाते हैं। अमेरिका और कनाडा में ब्लू लॉ (Blue Law) के हिसाब से शनिवार और रविवार को अधिकतर सरकारी दफ्तर बंद रहते हैं।

अब हफ्ते में 3 दिन छुट्टी की हो रही बात

एक रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर लोग चाहते हैं कि हफ्ते में 4 दिन छुट्टी हो। उनका मानना है कि इससे प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी और वर्क लाइफ बैलेंस भी होगा। इससे तनाव और चिंता का स्तर भी कम होगा। यह रिपोर्ट 1,113 नियोक्ताओं और कर्मचारियों पर एक फरवरी से सात मार्च के बीच कराए गए एक ऑनलाइन सर्वेक्षण पर आधारित है। सर्वे में नियोक्ताओं से पूछा गया था कि एक अतिरिक्त दिन का अवकाश मिलने पर क्या वे रोजाना 12 घंटे से अधिक समय तक काम करने को तैयार हैं, तो उनमें से 56 फीसदी लोग फौरन ही इसके लिए राजी हो गए। हालांकि, 44 फीसदी कर्मचारी कामकाजी घंटों को बढ़ाने के पक्ष में नहीं दिखे। इसी के साथ 60 फीसदी कर्मचारियों ने एक और दिन का अवकाश मिलने पर 12 घंटे से अधिक काम करने के लिए खुद को तैयार बताया।

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