साल 2013 में दूरदर्शन पर आए शो महाभारत को एक बार फिर से टेलीकास्ट किया जा रहा है. जब भी महाभारत का जिक्र आता है तो दुर्योधन के मामा और गांधारी के भाई शकुनि का नाम अनिवार्य रूप से दिमाग में आता है। शकुनि दुर्योधन के मन में पांडवों के लिए घृणा का बीज था। शकुनि के मामा ने पासा फेंका जिससे कौरव और पांडव भाई होते हुए भी कुरुक्षेत्र के युद्ध में आमने-सामने हो गए। महाभारत युद्ध के बाद कुरु वंश का नाश हो गया।
एक धार्मिक कथा के अनुसार, शकुनि नहीं चाहता था कि उसकी बहन धृतराष्ट्र से शादी करे। पितामह भीष्म के दबाव में गांधारी को धृतराष्ट्र से विवाह करना पड़ा। शकुनि बदला लेना चाहता था। प्रतिशोध की भावना से वह शकु की बहन के साथ हस्तिनापुर आ गया और षड्यंत्र रचने लगा।
एक बार भीष्म के पिता ने शकुनि के पूरे परिवार को कारागार में डाल दिया। बंदी गृह में उन्हें केवल इतना खाना दिया जाता था कि वे धीरे-धीरे भूखे मरने लगें। जब शकुनि के सभी भाई भूख के कारण खाने के लिए आपस में लड़ने लगे तो उसके पिता ने फैसला किया कि अब से सारा खाना एक ही व्यक्ति खाएगा। उसके पिता ने कहा कि अगर हम सब किसी की जान बचाने के लिए अपनी जान दे दें तो वह इंसान हमारा बदला ले सकता है। तो यह तय किया गया कि सबसे चतुर और सबसे बुद्धिमान को पूरा खाना खाना चाहिए।
शकुनि सबसे छोटा था लेकिन चतुर और बुद्धिमान होने के कारण सारा खाना शकुनि को मिलने लगा । शकुनि के परिवार ने उसकी एक टांग तोड़ दी ताकि वह अपने परिवार पर हुए अत्याचारों को न भूले। जिससे शकुनि लंगड़ा चलने लगा।
जब शकुनि के पिता कारावास के घर में मरने लगे, तो उन्होंने शकुनि की चौपाई में रुचि देखी और शकुनि को मेरी मृत्यु के बाद मेरी उंगलियों से पासा बनाने के लिए कहा। यह मेरे क्रोध से भरा होगा, ताकि चौपाई के खेल में तुम्हें कोई हरा न सके। इस वजह से शकुनि हर बार चौपाई का खेल जीत जाता था। वह चौपाई में पांडवों को हराने में भी सफल रहा।
