आपने कभी न कभी फिल्मों में देखा व सुना होगा की फांसी की सजा सुनाने के बाद पेन की निब तोड़ दी जाती है ? यह फिल्मों के अलावां हकीकत जीवन में फांसी की सजा के बाद पेन की निब तोड़ देते हैं जज|
भारत में केवल उन्हीं अपराधियों को फांसी (भारत में मृत्युदंड) दी जाती है जो जघन्य अपराधों की श्रेणी में आते हैं। मृत्युदंड अन्य सभी दंडों से बड़ा दंड है। इस भारतीय दंड संहिता के तहत एक अपराधी को मौत की सजा दी जाती है।
फांसी की सजा सुनाने के बाद पेन की निब क्यों तोड़ दी जाती है ?
फांसी की सजा के बाद पेन की निब क्यों तोड़ देते है जज ? (Do You Know Why Judge Break The Nib Of Pen After Death) इस सवाल का जबाब इसी पोस्ट में जानेंगे | किसी अपराधी को “फांसी” की सजा सुनाने के बाद इस फैसले को बदलना जज के लिए असंभव है | फांसी की सजा एक अपराधी की मौत से जुडी होती है इसीलिए इस कलम से किसी और को सजा न हो हैंग टिल डेथ (Hang Till Death) कहने के बाद पेन की निब तोड़ दी जाती है |
जिस तिथि को अपराधी को सजा मिलना तय होता है उसके 15 दिन पहले अपराधी के घरवाले को सूचित किया जाता है|
आपने यह भी सुना होगा की जल्लाद फांसी देने से पहले अपराधी के कान में कुछ कहता है | यह की मुझे माफ कर दो| अगर मेरे वस में होता तो तुम्हे माफ कर सत्य के राह पर चलने को कहता परन्तु मै हुक्म का गुलाम हूँ|
फांसी की सजा कोई टाल नहीं सकता क्यूंकि यह सबसे बड़ी सजा होती है और किसी के जीवन में मृतु लिखने के बाद पेन की निब भी तोड़ दी जाती है पर अपराधी फांसी पर दया के लिए राष्ट्रपति के पास छमा के लिए प्राथना कर सकता है | राष्ट्रपति अपने बुद्धि/विवेक के अनुसार छमा कर सकते है या नहीं कुछ कहा नहीं जा सकता|
अब आप समझ गए होंगे कि अपराधी की मौत का फरमान जारी होने के बाद निब तोड़ दी जाती हैं|
