आपने कई सुसाइड पॉइंट के बारें में तो सुना होगा जहां इंसान जाकर अपने जीवन का अंत कर लेता है लेकिन आज हम जिस सुसाइड पॉइंट के बारे में बता रहे हैं वो थोड़ी रहस्यमयी है। जापान के माउंट फूजी तलहटी में आवकिगोहारा का घने जंगल में जिस तरह से लोग आत्महत्या करने आते हैं ठीक उसी तरह जटिंगा में पक्षी आत्महत्या करने जाते हैं।

असम में एक छोटा सा गांव है जतिंगा। इसके बारे में ज्यादातर किस्से यहां के स्थानीय लोग सुनाते हैं। इसके अलावा, आपको इसके बारे में कई आर्टिकल पढ़ने को मिल जाएंगे। इस हरे भरे इलाके में हर साल मानसून के अंत में एक अजीबोगरीब वाक्या होता है। सूरज ढलने के बाद यहां हज़ारों की संख्या में पक्षी एक एक कर मरने लगते हैं। ये हर दिन होता है और स्थानीय निवासियों के अनुसार यहां पर बुरी आत्माओं का साया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि शायद पक्षी कोहरे की वजह से ठीक से देख और महसूस नहीं कर पाते और इसलिए वो पेड़ों से टकरा कर मर जाते हैं। पर फिर भी कोई ये नहीं जानता कि आखिर हर साल कई दिनों तक एक ही जगह पर ऐसा क्यों होता है।

जिंदगी और मौत का रहस्य जितना ही सुलझाया गया है वह उतना ही उलझता गया है। इसमें भी हैरान करने वाली बात तो यह है कि जिंदगी और मौत के रहस्य में सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि जीव-जंतु और पक्षी भी उलझ जाते हैं।

लोगों के आत्महत्या करने के कारण समझ में आ सकते हैं, लेकिन यहां मामला जरा अलग है, कोई अकेला पक्षी आत्महत्या नहीं करता बल्कि सामूहिक रूप से सभी आत्महत्या कर लेते हैं। आखिर ऐसी क्या वजह है ऐसी कौन-सी ताकत है जो उनको इसके लिए प्रेरित करती है या ऐसा कौन-सा दुख है, जो सभी को एकसाथ आत्महत्या करने पर मजबूर कर देता है।

यह बात हम यूं ही नहीं कह रहे हैं इसका पुख्ता सबूत भी मौजूद है हमारे पास। हम आपको ले चलते हैं एक ऐसी जगह जहां मौत के रहस्य में उलझकर आसमान को छूने वाले पक्षी खुद मौत को गले लगा लेते हैं। भारत के उत्तर पूर्वी राज्य असम में एक घाटी है जिसे जटिंगा वैली (जतिंगा वैली) कहते हैं। यहां जाने पर आपको पक्षियों के आत्म हत्या करने का नजारा खुद दिख जाएगा। करते है सामूहिक आत्महत्या

जटिंगा की कछार नामक घाटी की तलहटी में कूदकर हजारों पक्षी एक साथ एक खास मौसम में आत्महत्या कर लेते हैं। इसका क्या रहस्य है? वैज्ञानिक इस पर अभी तक कोई खुलासा नहीं कर पाए हैं। यह गांव पक्षियों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं के कारण दुनियाभर में सुर्खियों में बना हुआ है। मानसून के महीने में यह घटना अधिक होती है। इसके अलावा अमावस और कोहरे वाली रात को पक्षियों के आत्म हत्या करने के मामले अधिक देखने को मिलते हैं।

क्या है सामूहिक आत्महत्या की वजह

पक्षियों के आत्महत्या का रहस्य क्या है इस बात को लेकर कई तरह की बातें इस क्षेत्र में प्रचलित थी। यहां की जनजाति यह मानती है कि यह भूत-प्रेतों और अदृश्य ताकतों का काम है। जबकि वैज्ञानिक धारणा यह है कि यहां तेज हवाओं से पक्षियों का संतुलन बिगड़ जाता है और वह आस-पास मौजूद पेडों से टकराकर घायल हो जाते हैं और मर जाते हैं। अब बात चाहे जो भी हो लेकिन यह स्थान पक्षियों के आत्म हत्या के कारण दुनिया भर में रहस्य बना हुआ है।
ये घटनाएं सितंबर से नवंबर के बीच अंधेरी रात में घटती हैं, जब नम और कोहरे-भरे मौसम में हवाएं दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर बहने लगती हैं। रात के अंधेरे में पक्षी रोशनी के आस-पास उड़ने लगते हैं। इस समय वे मदहोशी जैसी अवस्था में होते हैं जिसके कारण ये आसपास की चीजों से टकराकर मर जाते हैं।

भारत सरकार ने इस गुत्थी को सुलझाने के लिए प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ डॉ. सेन गुप्ता को नियुक्त किया था। डॉ. गुप्ता ने यहां लंबे समय तक अध्ययन करने के बाद कहा कि पक्षियों के इस असामान्य व्यवहार के पीछे मौसम और चुम्बकीय शक्तियों का हाथ है।
उन्होंने बताया कि वर्षा के मौसम में जब कोहरा छाया हो और हवा चल रही हो, तब शाम के समय जतिंगा घाटी की चुम्बकीय स्थिति में तेजी से बदलाव आ जाता है। इस परिवर्तन के कारण ही पक्षी असामान्य व्यवहार करते हैं और वे रोशनी की ओर आकर्षित होते हैं। अपने शोध के बाद उन्होंने यह सलाह दी कि ऐसे समय में रोशनी जलाने से बचा जाए। उनके इस सलाह पर अमल करने से यहां होने वाली पक्षियों की मौत में 40 फीसदी की कमी आई है।

जतिंगा में 44 जातियों की स्थानीय चिड़ियाएं आत्महत्या करती हैं। इनमें टाइगर बिट्टर्न, ब्लैक बिट्टर्न, लिटिल इहरेट, पॉन्ड हेरॉन, इंडियन पिट्टा और किंगफिशर जाति की चिड़ियाएं अधिक शामिल होती हैं।

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