जमीन के लिए चाचा की धोखेबाजी ने फूलन को डकैत बना दिया। इसके बाद उसके साथ हुए गैंगरेप ने उसका कलेजा छलनी कर दिया। इसके बाद गैंगवार में विक्रम मल्लाह की मौत ने फूलन की बौखलाहट चरम पर पहुंच गई। प्रतिशोध की ज्वाला इस कदर धधक उठी कि उसने और उसके गैंग ने गांव में 20 लोगों को लाइन में खड़ाकर गोलियों से भून दिया था। पूरा बेहमई गांव गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा।
कानपुर देहात के शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि फूलन के गैंग ने जगन्नाथ सिंह, तुलसीराम, सुरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, लाल सिंह, रामाधार सिंह, वीरेंद्र सिंह, शिवराम सिंह, रामचंद्र सिंह, शिव बालक सिंह, नरेश सिंह, दशरथ सिंह, बनवारी सिंह, हिम्मत सिंह, हरिओम सिंह, हुकुम सिंह समेत 20 लोगों की हत्या कर दी थी। इसके अलावा जंटर सिंह समेत आधा दर्जन ग्रामीण गोली से घायल हुए थे।
फूलन देवी के खिलाफ दर्ज हुए थे 48 मामले
फूलन देवी ने 1978 बीहड़ में कदम रखते ही डकैती, लूट के साथ अपहरण की ताबड़तोड़ वारदातों से दहशत फैला दी। दस्यु जीवन का पहला अपराध 1978 में कालपी कोतवाली में डकैती और जान से मारने के प्रयास का मामला दर्ज हुआ। कालपी कोतवाली में फूलन के खिलाफ 15 मामले मिले। पांच साल के दस्यु जीवन में फूलन पर कुल 48 मामले दर्ज हुए। जगम्मनपुर में दिन दहाड़े डकैती के साथ 6 ग्रामीणों का सामूहिक अपहरण और फिर बेहमई से सामूहिक नरसंहार को अंजाम दिया।
मान सिंह ने चलाई थी पहली गोली
बेहमई में जब गांव के लोगों को एक घेरे में खड़ा कर लिया और गालियां दी। इसके बाद फूलन ने मान सिंह के कहां था कि मार दो इस सालों को। बस इतना इशारा मिलते ही उसने गोली चला दी। इलके बाद गोलियों की तड़तड़हाट से पूरा गांव गूंज उठा।
35 डकैतों पर दर्ज हुई थी रिपोर्ट
राजाराम ने फूलन देवी समेत 35 के खिलाफ थाना सिकंदरा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद यह कांड देशभर की सुर्खियों में रहा था।
