सैकड़ों साल पहले ज्वालामुखी फटने से हवाई के द्वीप बने. इन द्वीपों के साथ ज्वालामुखी लावे से कई गुफाएं और सुरंगें भी बनीं. बताया जाता है कि ये सुरंगे बेहद ठंडी हैं और इसके साथ ही यहां बड़ी मात्र में जहरीली गैसें और खनिज मौजूद है. ऐसे में यहां जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती लेकिन एक नई रिसर्च में पश्चिमी अमेरिका के हवाई द्वीप के बारे में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं.

फ्रंटियर्स ऑफ माइक्रोबायोलॉजी में पब्लिश एक स्टडी में बताया गया है कि इस द्वीप पर मौजूद सैकड़ों साल पुरानी सुरंगें काफी ठंडी, अंधेरी और जहरीली गैसों के अलावा कई तरह के खनिज पदार्थों से भरी हुई हैं. हालांकि ऐसी परिस्थितियों में जीवन संभव नहीं है लेकिन वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि ज्वालामुखी के कारण निर्मित इन सुरंगों और गुफाओं में कई सूक्ष्म जीव फैलें हैं. इन जीवों को देख पाना बेहद मुश्किल है. वैज्ञानिकों के अनुसार ये इस धरती के सबसे छोटे जिंदा प्राणी हैं. इससे ज्यादा इनके बारे में अभी तक पता नहीं लगाया जा सकता है.
Hundreds of years ago, the volcanic processes that created Hawaii also formed a network of underground caves ?
They're inhospitable to most life but, scientists have found colonies of microbes that possess many secrets?
Let's unlock the mystery ?https://t.co/BYzLTm8m8z
— Metro (@MetroUK) July 25, 2022
वैज्ञानिकों के दावे के अनुसार इन सुरंगों और गुफाओं में डार्क मेटर का निर्माण हो चुका है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इन सूक्ष्म जीवों में 99.999 फीसदी का पता लगा पाना बहुत ही मुश्किल है. इसी वजह से इन जगहों पर एक रहस्यमयी जिंदगी का निर्माण हुआ है और इसे ‘डार्क मैटर’ के तौर पर जाना जा रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इन सूक्ष्म जीवों को पृथ्वी के वातावरण में आने में काफी समय लगेगा.
हवाई की इन लावा भरी गुफाओं में वैज्ञानिकों की रुचि बढ़ती जा रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें लगता है यहां की स्थितियां मंगल ग्रह या फिर किसी सुदूर ग्रह जैसी हैं. वैज्ञानिकों का दावा है कि एक सूक्ष्म जीव इन पुरानी लावा ट्यूब में 600 से 800 साल तक जिंदा रह सकता है. ऐसे में उनका कहना है ये संभव है कि ऐसे कुछ सूक्ष्म जीव शायद मंगल ग्रह पर ही किसी स्थिति में देखने को मिलें.
500 साल पुरानी हैं गुफाएं
रिसर्च के अनुसार इन गुफाएं की आयु 500 साल से भी ज्यादा हो सकती है. ऐसे में इन सूक्ष्मजीवों का जीवन यहां पर होना बहुत ही आसान है. इसलिए उनका मानना है कि इन जीवों के लिए और ज्यादा फैलने में अभी समय है. जिस तरह से पर्यावरण बदलेगा, इनका सामाजिक ढांचा भी बदलता जाएगा. वैज्ञानिकों के अनुसार नई गुफा ज्यादा सक्रिय होती है. ऐसी नई गुफाओं में इस तरह के सूक्ष्म जीवों का होना और ज्यादा आसान रहता है.
मैनोआ में हवाई यूनिवर्सिटी में माइक्रोबायोलॉजिस्ट रेबेका प्रेसकॉट के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक सवाल पैदा होता है कि क्या पर्यावरण की अधिकता इस तरह के सूक्ष्म जीवों का निर्माण कर सकती है जहां पर ये जीव एक-दूसरे पर ही निर्भर हों. हालांकि वैज्ञानिकों ने इन गुफाओं में मौजूद इन सूक्ष्म जीवों के बारे में ज्यादा कुछ भी नहीं कहा है लेकिन उनका कहना है कि इन गुफाओं में उन्हें क्लोरोफ्लेक्सी नामक बैक्टीरिया के बारे में पता लगा है. ये बैक्टीरिया ऑक्सीजन का निर्माण करते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक ये बैक्टीरिया पर्यावरण के लिए बड़े मददगार साबित होते हैं.
